पहले सीधी बात
अगर बीज सीधा खेत में चला गया बिना ट्रीटमेंट के, तो ये risk होता है:
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बीज सड़ सकता है / अंकुर नहीं निकलेगा
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पौधा कमजोर निकलेगा
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रोग खेत में पूरे plot में फैल जाएगा
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आपको दुबारा re-sow (दोबारा बुआई) करना पड़ सकता है → सीधा extra पैसा + समय का नुकसान
लेकिन अगर वही बीज सही तरीके से ट्रीट कर दिया:
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जड़ मज़बूत बनती है
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पौधा बराबर-बराबर निकलता है (uniform stand)
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शुरुआती फंगस और कीट का अटैक कम होता है
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कुल मिलाकर पैदावार (yield) stable और safe होती है
यानी बीज ट्रीटमेंट = फसल का insurance, बहुत कम खर्च में।
बीज ट्रीटमेंट होता क्या है?
“बीज ट्रीटमेंट” मतलब बोने से पहले बीज को हल्के से coat करना / soak करना / mix करना ऐसे पदार्थों से जो बीज को बचाते और ताकत देते हैं।
ये substances 4 टाइप के होते हैं:
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Fungicide (रोग रोधक दवा) – ताकि बीज और नई जड़ पर फफूंद (fungus) का हमला न हो।
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Insecticide (कीट रोधक) – ताकि शुरुआती मिट्टी वाले कीड़े (soil insects) बीज को न खाएं।
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Bio / Trichoderma / Beneficial microbes – अच्छे सूक्ष्मजीव जो खराब रोगजनक (disease germs) को दबाते हैं।
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Micronutrient / Growth booster – ताकि अंकुर तेज़ और एक जैसा निकले, पीला न गिरे, शुरुआत में stress कम हो।
हर किसान को चारों करने की ज़रूरत नहीं है। लेकिन कम से कम fungal protection almost must है गेहूं में, क्योंकि damping off / seed rot शुरू में पूरी लाइन खराब कर देता है।
बिना ट्रीटमेंट वाले बीज में दिक्कत क्यों आती है?
गेहूं का बीज जमीन में जाते ही नमी लेता है और फूटने की कोशिश करता है। उसी टाइम fungus attack करता है, खासकर जब:
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खेत में नमी है लेकिन तापमान ठंडा है
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पुराना बीज है
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बीज सही से साफ नहीं किया गया है (मिट्टी, टूटा दाना, धूल लगी है)
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लो-lying जगहों में पानी बैठता है
Result?
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बीज काला/भूरा होकर सड़ जाता है
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अंकुर बाहर ही नहीं आता
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एक एकड़ के अंदर कई खाली patch बनते हैं
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बाद में जो पौधे निकले हैं वो भी पतले और कमजोर होते हैं
ये सब सीधा final उपज को मार देता है, क्योंकि गेहूं में शुरुआत का plant population ही पूरा खेल है।
बीज ट्रीटमेंट से क्या फायदा होता है?
1. Stand uniform रहता है
हर जगह से पौधा बराबर-बराबर निकलता है, gap नहीं बनता। बाद में तुम्हें “दोबारा बीज गिराओ” वाली मेहनत नहीं करनी पड़ती।
2. शुरुआती रोग कंट्रोल रहता है
जैसे seed rot, root rot, damping off वगैरह। ये रोग अगर अंदर से शुरू हुआ तो बाद में कोई भी स्प्रे 100% नहीं बचा सकता, क्योंकि problem seed के अंदर से आई है, पत्ती पर नहीं।
3. Plant की शुरुआती energy बढ़ती है
ट्रीटेड बीज जल्दी break करता है dormancy और जड़ जल्दी पकड़ लेता है, मतलब पौधा ठंडी हवा और हल्की नमी की कमी भी better झेल लेता है।
4. पैसों की बचत
जब 1 बार में जाड़ा crop ठीक से establish हो गया, फिर बार-बार re-sowing, extra बीज, extra मजदूरी — ये सब नहीं लगता।
सच बोलें तो बीज ट्रीटमेंट कुछ रुपये प्रति क्विंटल का काम है, और नुकसान बचता है हजारों में per acre.
कौन सा ट्रीटमेंट कब काम आता है?
1. Fungicide treatment
क्यों?
मिट्टी और बीज दोनों में ऐसे फंगस रहते हैं जो बीज को सड़ा देते हैं या जड़ को गलाते हैं। Fungicide coating बीज के चारों ओर एक छोटा सा “सुरक्षा कवच” जैसा बना देता है जब तक बीज अंकुरित नहीं हो जाता और जड़ पकड़ नहीं लेता।
किसको ज़रूरी है?
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Purana (last season बचा हुआ) गेहूं बीज
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Farm-saved बीज (यानी जो आप अपनी पिछली फसल से रखे थे, certified पैक नहीं है)
Note: खरीदा हुआ branded treated seed कई बार पहले से color coating में आता है। अगर उस पर पहले से लाल / गुलाबी / हरा रंग coating है और लिखा रहता है "Treated seed – Do not use for food", तो दोबारा fungicide डालने की जरूरत नहीं होती। Overdose नहीं करना चाहिए.
2. Insecticide / seed protector
ये ज़्यादातर तब useful है जब मिट्टी में early stage कीट का दबाव बहुत high है (white grub type soil insect, आदि)। हर जगह जरूरी नहीं है। Wheat में ये second priority है; first priority fungus control है.
3. Bio treatment (Trichoderma वगैरह)
ये basically अच्छे microbes हैं जो बुरे fungus को दबाते हैं और root zone healthy बनाते हैं।
फायदा: chemical load कम होता है, और root लगातार protect रहती है (living shield की तरह)।
लेकिन rule है: bio product और chemical fungicide को एक ही समय एक ही बीज पे mix नहीं करते (क्योंकि fungicide मार ही देगा उस अच्छे माइक्रोब को)। आमतौर पर farmer दोनों करना चाहता है “extra safe” सोच के साथ, लेकिन ऐसे करने से पैसा भी जाता है और असर भी नहीं आता। Correct तरीका होता है decide करना: इस बार मैं chemical जा रहा हूँ या biological?
4. Micronutrient / booster coating
ये हल्का सा nutrition देता है ताकि अंकुर तेज़ निकले और शुरुआती पत्ती पीली न पड़े। ये especially काम आता है हल्की पोषक कमी वाली जमीन में या जहाँ ठंडी शुरुआत में plant stress में आ जाता है।
बीज ट्रीटमेंट करने की basic प्रक्रिया
ये एक safe, common तरीका है जो ज़्यादातर किसान follow करते हैं:
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बीज को पहले साफ करो
टुटा दाना, कचरा, ढेला, भूसी हटा दो. गंदा बीज = uneven coating. -
सही मात्रा नापो
कभी भी “aankh se” मत डालो. ज़्यादा दोगे तो बीज को खुद stress पड़ेगा; कम दोगे तो protection आधा रहेगा.-
Normally ये dose लिखा रहता है packet पे (per kg बीज कितना ml या कितना gram).
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यही follow करना ज़रूरी है.
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बीज को एक साफ प्लास्टिक शीट या टब में फैलाओ
मिट्टी वाली बोरी में नहीं। मिट्टी लगी रही तो दवा मिट्टी पे चिपक जाएगी, बीज पे नहीं। -
दवा को थोड़े से पानी या sticker के साथ मिला के हल्का mist जैसा बनाओ (अगर powder नहीं, liquid है)
फिर बीज को घुमाकर अच्छे से coat करो ताकि हर दाना हल्का सा रंग ले ले, लेकिनभीग कर टपकता न रहे। -
Coated बीज को सुखाओ (छांव में)
तेज धूप में मत सुखाओ, वरना कुछ दवाइयाँ degrade हो जाती हैं या बीज खुद heat ले लेता है। बस इतना सुखाना है कि दाने आपस में चिपकें नहीं। -
उसी दिन या जल्दी बो दो
बहुत देर तक store मत रखो, especially अगर बीज पर नमी आ गई है। नम बीज को बंद करोगे तो अंदर गर्मी बनेगी और अंकुर खुद बैग में ही टूटने की कोशिश करेगा, quality गिर जाएगी।
Short कहें तो:
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बीज ट्रीटमेंट = बीज को शील्ड देना
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शील्ड = शुरुवाती 15–20 दिन की लाइफ insurance
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शुरुवाती 15–20 दिन अगर safe हैं → पूरी फसल का बेस strong है
गेहूं में शुरुआत ही गेम है. बाद में top-dressing, irrigation, spray सब तब काम करता है जब पौधे हैं ही.
अगर पौधा जमीन से निकला ही नहीं या आधा मर गया तो बाकी पूरा खर्च zero हो जाएगा.