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गेहूं की बुवाई 2026: सही समय, उन्नत किस्में, बीज की मात्रा और खाद की पूरी जानकारी

गेहूं की बुवाई 2026: सही समय, उन्नत किस्में, बीज की मात्रा और खाद की पूरी जानकारी

रबी 2026-27 का सीजन शुरू हो चुका है और गेहूं की बुवाई की तैयारी का सही समय यही है। गेहूं की उपज का बड़ा हिस्सा खेत में बीज डालने से पहले ही तय हो जाता है: किस तारीख को बुवाई हुई, कौन-सी किस्म चुनी गई, बीज कितना डाला गया और खाद किस समय व कितनी दी गई। इनमें से एक भी चीज गलत हो जाए तो अच्छी मिट्टी और सिंचाई के बाद भी उपज घट सकती है।

इस लेख में हम गेहूं की बुवाई 2026 से जुड़ी हर जरूरी बात क्रम से समझेंगे: जोन के अनुसार सही समय, खेत की तैयारी, उन्नत किस्में, प्रति एकड़ बीज की मात्रा, बीज उपचार, खाद-उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण और बुवाई की आम गलतियां। सभी मात्राएं प्रति एकड़ और प्रति हेक्टेयर, दोनों में दी गई हैं ताकि किसान भाई सीधे अपने खेत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकें।

गेहूं की बुवाई 2026 एक नज़र में

बिंदुसमय पर बुवाई (सिंचित)देर से बुवाई
बुवाई का समयजोन के अनुसार नवंबर का पहला से तीसरा सप्ताहनवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर तक
बीज दर40 किग्रा/एकड़ (100 किग्रा/हेक्टेयर)50 किग्रा/एकड़ (125 किग्रा/हेक्टेयर)
कतार से कतार की दूरी20–22 सेमी18–20 सेमी
बुवाई की गहराई4–5 सेमी4–5 सेमी
नाइट्रोजन : फॉस्फोरस : पोटाश (किग्रा/हेक्टेयर)150 : 60 : 40120 : 60 : 40
सिंचाई5–6 सिंचाई4–5 सिंचाई
ध्यान दें: ये मात्राएं भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIWBR) की सामान्य सिफारिशों पर आधारित हैं। अपनी मिट्टी की जांच, किस्म और जिले की जलवायु के अनुसार इनमें बदलाव करें और अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) की सलाह जरूर लें।

गेहूं की बुवाई का सही समय क्या है?

गेहूं ठंडे मौसम की फसल है। बीज के अच्छे अंकुरण के लिए बुवाई के समय दिन का तापमान लगभग 20–25 डिग्री सेल्सियस होना ठीक रहता है। इससे ज्यादा गर्मी में बुवाई करने पर अंकुरण कमजोर रहता है और पौधे जल्दी पक सकते हैं, जबकि बहुत देरी करने पर फसल को पकते समय मार्च की गर्मी का सामना करना पड़ता है और दाने पतले रह जाते हैं।

जोन के अनुसार गेहूं की बुवाई का समय उत्तर-पश्चिम और उत्तर-पूर्वी मैदानी, मध्य भारत और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में समय पर और देर से बुवाई की तारीखों का चार्ट जोन के अनुसार बुवाई का समय (सिंचित गेहूं) 1 नव15 नव1 दिस15 दिस31 दिस उत्तर-पश्चिम मैदानी पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उ.प्र. 1–20 नव 25 नव–15 दिस उत्तर-पूर्वी मैदानी पूर्वी उ.प्र., बिहार, झारखंड 10–25 नव 26 नव–20 दिस मध्य भारत म.प्र., गुजरात, छत्तीसगढ़ 10–20 नव 1–15 दिस प्रायद्वीपीय महाराष्ट्र, कर्नाटक, आ.प्र. 1–15 नव 25 नव–5 दिस समय पर बुवाई देर से बुवाई स्रोत: ICAR-IIWBR की सामान्य सलाह
चित्र 1: जोन के अनुसार गेहूं की बुवाई का समय। अपने जिले के लिए KVK की सलाह भी देखें।

जोन के अनुसार बुवाई का समय (तालिका)

क्षेत्र / जोनराज्यसमय पर बुवाईदेर से बुवाई
उत्तर-पश्चिम मैदानीपंजाब, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान1–20 नवंबर25 नवंबर के बाद, दिसंबर के मध्य तक
उत्तर-पूर्वी मैदानीपूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, असम10–25 नवंबर26 नवंबर से दिसंबर के तीसरे सप्ताह तक
मध्य भारतमध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, दक्षिणी राजस्थान10–20 नवंबर1–15 दिसंबर
प्रायद्वीपीयमहाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश1–15 नवंबरनवंबर के आखिरी सप्ताह से दिसंबर के पहले सप्ताह तक

झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में धान की कटाई देर से होने के कारण बुवाई अक्सर नवंबर के आखिर तक खिसक जाती है। ऐसे खेतों में किस्म और बीज दर का चुनाव देर से बुवाई के हिसाब से करना चाहिए।

देर से बुवाई का नुकसान और क्या करें

नवंबर के बाद हर दिन की देरी से गेहूं की उपज घटती जाती है। आम तौर पर यह कमी 30–40 किग्रा प्रति हेक्टेयर प्रति दिन तक आंकी जाती है। अगर बुवाई देर से हो रही है, तो इन बातों का ध्यान रखें:

  • सिर्फ देर से बुवाई के लिए अनुशंसित किस्में चुनें।
  • बीज दर बढ़ाकर 50 किग्रा/एकड़ (125 किग्रा/हेक्टेयर) करें।
  • नाइट्रोजन की मात्रा थोड़ी कम (120 किग्रा/हेक्टेयर) रखें और बुवाई के बाद पहली सिंचाई समय पर दें।
  • खेत में पलेवा देकर तुरंत जुताई और बुवाई करें, ताकि अंकुरण में देर न हो।

अगेती बुवाई में सावधानी

कुछ किस्में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से बुवाई के लिए अनुशंसित हैं, लेकिन तभी जब उनके लिए ऐसा बताया गया हो। सामान्य किस्मों को बहुत जल्दी बोने पर पौधे जरूरत से ज्यादा बढ़ जाते हैं, कल्ले कम बनते हैं और पीला रतुआ व माहू जैसे रोगों-कीटों का खतरा बढ़ जाता है। तापमान ज्यादा हो तो बुवाई कुछ दिन टाल देना बेहतर है।

बुवाई से पहले खेत की तैयारी

गेहूं के लिए अच्छे जल निकास वाली दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी रहती है, जिसका pH लगभग 6.0 से 7.5 के बीच हो। धान की कटाई के बाद खेत तैयार करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  1. मिट्टी की जांच: बुवाई से पहले मिट्टी की जांच कराएं। इससे पता चलता है कि कितना नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, जिंक या सल्फर चाहिए।
  2. पलेवा: खेत में नमी कम हो तो हल्का पलेवा (बुवाई से पहले की सिंचाई) दें। इससे अंकुरण एक समान होता है।
  3. जुताई: 2–3 बार जुताई करके पाटा लगाएं, ताकि मिट्टी भुरभुरी और समतल हो जाए। समतल खेत में सिंचाई का पानी बराबर पहुंचता है।
  4. गोबर की खाद: बुवाई से 15–20 दिन पहले अच्छी सड़ी गोबर की खाद (लगभग 4–5 टन प्रति एकड़) मिलाने से मिट्टी की सेहत सुधरती है।
  5. पराली का प्रबंधन: धान की पराली जलाने की जगह जीरो टिल ड्रिल या हैप्पी सीडर से बुवाई करने पर समय, डीजल और मजदूरी तीनों बचते हैं और मिट्टी में जैविक पदार्थ बना रहता है।

गेहूं की उन्नत किस्में (रबी 2026-27)

सही किस्म का चुनाव अपने जोन, बुवाई के समय और सिंचाई की उपलब्धता के हिसाब से करना चाहिए। नीचे ICAR-IIWBR की जोन के अनुसार अनुशंसित किस्मों की सूची दी गई है। राज्य कृषि विश्वविद्यालय अपने क्षेत्र के लिए इसमें बदलाव कर सकते हैं।

जोनसमय पर / अगेती बुवाई (सिंचित)देर से बुवाई (सिंचित)सीमित सिंचाई / असिंचित
उत्तर-पश्चिम मैदानीDBW 187, DBW 222, DBW 303, DBW 327, DBW 370, DBW 371, DBW 372, HD 3086, HD 3226, HD 3386, PBW 826, PBW 872, WH 1105DBW 90, WH 1124, DBW 71, HD 3059, PBW 590PBW 644, WH 1080, HD 3043
उत्तर-पूर्वी मैदानीDBW 187, DBW 222, PBW 826, HD 3086, HD 3411, K 1006HD 2985, HI 1563, DBW 14, NW 2036HD 2888, MACS 6145
मध्य भारतDBW 187, DBW 303, DBW 327, HI 1636, HI 1650, HI 8759, DBW 110, GW 322MP 3336, Raj 4238, HD 2932, HD 2864MP 3288, MP 3173, HI 1531, HI 1500
प्रायद्वीपीयDBW 168, MACS 6478, MACS 6222, UAS 304, NIAW 917HD 3090, AKAW 4627, HD 2932NIAW 1415, HD 2987

किस्म चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें

  • रोग प्रतिरोधकता: पीला और भूरा रतुआ गेहूं के सबसे नुकसानदायक रोग हैं। अपने इलाके में रतुआ प्रतिरोधी किस्मों को प्राथमिकता दें। उदाहरण के लिए DBW 327 को पीले और भूरे रतुआ के प्रति रोधी तथा गर्मी सहन करने वाली किस्म के रूप में जाना जाता है।
  • पकने की अवधि: देर से बुवाई में जल्दी पकने वाली किस्म चुनें, ताकि मार्च की गर्मी से पहले फसल पक जाए।
  • सिंचाई की उपलब्धता: पानी कम हो तो असिंचित या सीमित सिंचाई वाली किस्में लें।
  • प्रमाणित बीज: बीज हमेशा प्रमाणित या विश्वसनीय स्रोत से लें और पक्का बिल लें। हर 3–4 साल में बीज बदलना अच्छा रहता है।
  • एक ही किस्म पूरे खेत में नहीं: दो–तीन अलग किस्में लगाने से रोग या मौसम का जोखिम बंटता है।

गेहूं की बीज दर: प्रति एकड़ कितना बीज डालें?

बीज की मात्रा न कम होनी चाहिए, न ज्यादा। कम बीज से पौधे कम रह जाते हैं और ज्यादा बीज से पौधे घने होकर गिरने (लॉजिंग) और रोगों के शिकार हो जाते हैं। साथ ही बीज पर खर्च भी बढ़ता है।

गेहूं की बीज दर और बुवाई की गहराई समय पर बुवाई में 40 किलो प्रति एकड़ और देर से बुवाई में 50 किलो प्रति एकड़ बीज, कतारों के बीच 20 से 22 सेंटीमीटर की दूरी और 4 से 5 सेंटीमीटर की गहराई बीज दर और बुवाई की ज्यामिति समय पर बुवाई (सिंचित) 40 किग्रा/एकड़ (100 किग्रा/हेक्टेयर) देर से बुवाई / सीमित सिंचाई 50 किग्रा/एकड़ (125 किग्रा/हेक्टेयर) कतार से कतार 20–22 सेमी गहराई 4–5 सेमी बीज एक समान गहराई पर डालें भूमि की सतह 1 हेक्टेयर = 2.47 एकड़। अंकुरण 85% से कम हो तो बीज दर उसी अनुपात में बढ़ाएं।
चित्र 2: गेहूं की बीज दर, कतारों की दूरी और बुवाई की गहराई।
स्थितिबीज दर (किग्रा/हेक्टेयर)बीज दर (किग्रा/एकड़)
समय पर बुवाई, सिंचित, लाइन में10040
देर से बुवाई या असिंचित12550
मोटे दाने वाली किस्मसामान्य दर से थोड़ा ऊपरसामान्य दर से थोड़ा ऊपर
रेज्ड बेड (मेड़) पर बुवाई50–8020–32

अपने बीज के हिसाब से बीज दर कैसे निकालें?

अलग-अलग किस्मों के दाने का आकार अलग होता है, इसलिए इस सूत्र से अपने बीज की सही मात्रा निकाल सकते हैं:

बीज दर (किग्रा/हेक्टेयर) = [प्रति वर्ग मीटर पौधों की संख्या × 1000 दानों का वजन (ग्राम)] ÷ अंकुरण प्रतिशत

उदाहरण: लक्ष्य 250 पौधे प्रति वर्ग मीटर, 1000 दानों का वजन 40 ग्राम और अंकुरण 90% हो, तो बीज दर = (250 × 40) ÷ 90 ≈ 111 किग्रा/हेक्टेयर, यानी लगभग 45 किग्रा/एकड़।

अंकुरण की जांच घर पर कैसे करें?

100 दाने गीले कपड़े या कागज में रखकर 5–7 दिन छायादार जगह में रखें। जितने दाने अंकुरित हों, वही अंकुरण प्रतिशत है। अगर 100 में से 85 से कम दाने जमें, तो बीज दर उसी हिसाब से बढ़ाएं।

बुवाई की विधि

  • सीड ड्रिल या जीरो टिल मशीन: कतार में बुवाई सबसे अच्छी है। बीज और खाद दोनों एक समान गहराई पर जाते हैं।
  • कतार से कतार की दूरी: 20–22 सेमी रखें। देर से बुवाई में 18–20 सेमी तक रखी जा सकती है।
  • गहराई: 4–5 सेमी। ज्यादा गहरा बोने से अंकुर कमजोर निकलते हैं।
  • छिटकवां विधि से बचें: इसमें बीज ज्यादा लगता है, पौधे असमान उगते हैं और निराई-गुड़ाई कठिन हो जाती है।

बीज उपचार: बुवाई से पहले जरूर करें

बीज उपचार कम खर्च में फसल को शुरुआत से ही कई रोगों और कीटों से बचाता है। इससे कंडुआ (खुला कंडुआ), जड़ सड़न और दीमक जैसी समस्याओं का जोखिम घटता है।

  • फफूंदनाशक से उपचार: कार्बोक्सिन + थिरम या टेबुकोनाजोल जैसे अनुशंसित फफूंदनाशक से, उत्पाद के लेबल पर लिखी मात्रा के अनुसार, बीज को उपचारित करें।
  • जैविक उपचार: ट्राइकोडर्मा जैसे जैव-फफूंदनाशक से बीज उपचार मिट्टी जनित रोगों में सहायक है। इसे रासायनिक फफूंदनाशक के साथ एक ही समय पर न मिलाएं।
  • दीमक वाले खेत: जिन खेतों में दीमक की समस्या रहती है वहां इमिडाक्लोप्रिड आधारित बीज उपचार उत्पाद लेबल के अनुसार उपयोग करें।

उपचार की विधि: सूखे और साफ बीज को छायादार जगह पर प्लास्टिक शीट या ड्रम में डालें, तय मात्रा में दवा मिलाकर अच्छी तरह हिलाएं ताकि हर दाने पर बराबर लेप लगे, फिर छाया में सुखाकर उसी दिन या अगले दिन बो दें। उपचार करते समय दस्ताने और मास्क पहनें।

बीज उपचार के लिए KisanShop पर उपलब्ध कुछ उत्पाद: धानुका विटावैक्स पावर (कार्बोक्सिन 37.5% + थिरम 37.5% DS), केमली चैटबॉट सीड ट्रीटमेंट (कार्बोक्सिन + थिरम + इमिडाक्लोप्रिड) और जैविक विकल्प के रूप में पैदावार ट्राइसन (ट्राइकोडर्मा विरिडी)।

गेहूं में खाद और उर्वरक: कब, कितनी और कैसे दें?

गेहूं की अच्छी उपज के लिए नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P) और पोटाश (K) की संतुलित मात्रा चाहिए। आम तौर पर समय पर बुवाई वाले सिंचित गेहूं के लिए 150:60:40 किग्रा/हेक्टेयर (नाइट्रोजन : फॉस्फोरस : पोटाश) की सिफारिश की जाती है, जबकि देर से बुवाई में 120:60:40 किग्रा/हेक्टेयर। प्रति एकड़ के हिसाब से यह लगभग 60:24:16 और 48:24:16 किग्रा बैठता है।

उर्वरकसमय पर बुवाई (किग्रा/एकड़)देर से बुवाई (किग्रा/एकड़)
DAP5252
म्यूरेट ऑफ पोटाश (MOP)2727
यूरिया (कुल)11084
कुल नाइट्रोजन (N)6048

DAP में भी लगभग 18% नाइट्रोजन होती है, इसलिए यूरिया की मात्रा उसी के हिसाब से घटाकर ऊपर की तालिका बनाई गई है। यदि आप DAP की जगह SSP या NPK कॉम्प्लेक्स उर्वरक इस्तेमाल करते हैं, तो पोषक तत्वों की मात्रा के हिसाब से गणना बदलेगी।

गेहूं में खाद देने का कार्यक्रम, प्रति एकड़ बुवाई के समय DAP 52, पोटाश 27 और यूरिया 23 किलो; पहली सिंचाई पर यूरिया 44 किलो; दूसरी सिंचाई पर यूरिया 44 किलो खाद कब दें? (समय पर बुवाई, प्रति एकड़) बुवाई के समय (बेसल खुराक) DAP52 किग्रा पोटाश27 किग्रा यूरिया23 किग्रा N का 1/3 + पूरा P और K पहली सिंचाई (20–25 दिन, CRI अवस्था) यूरिया 44 किग्रा बची N का आधा हिस्सा दूसरी सिंचाई (40–45 दिन, कल्ले बनते समय) यूरिया 44 किग्रा बची N का बाकी आधा हिस्सा कुल: NPK 150:60:40 किग्रा/हेक्टेयर ≈ 60:24:16 किग्रा/एकड़ जिंक की कमी वाले खेत में बुवाई के समय जिंक सल्फेट (21%) 10 किग्रा/एकड़ अलग से दें
चित्र 3: समय पर बुवाई में खाद देने का कार्यक्रम (प्रति एकड़)। मात्रा मिट्टी की जांच के अनुसार बदलें।

खाद देने के नियम

  • बेसल खुराक: बुवाई के समय नाइट्रोजन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा और फॉस्फोरस व पोटाश की पूरी मात्रा दें। इन्हें बीज के साथ ड्रिल से या बुवाई से ठीक पहले मिट्टी में मिलाएं।
  • टॉप ड्रेसिंग: बची हुई नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में पहली और दूसरी सिंचाई के बाद (या ठीक पहले) दें। खाद हमेशा ओट (हल्की नमी) में डालें।
  • ज्यादा यूरिया न डालें: जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन से पौधे बहुत हरे और कमजोर होकर गिर जाते हैं और रोग-कीट भी बढ़ते हैं।
  • सल्फर: सल्फर की कमी वाली मिट्टी में 20–25 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेयर देने से दाने की गुणवत्ता और उपज में सुधार होता है।
  • जिंक: जिंक की कमी वाली मिट्टी में 25 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 10 किग्रा/एकड़) जिंक सल्फेट (21%) बुवाई के समय डालें। यह हर साल देना जरूरी नहीं, आम तौर पर 2–3 साल में एक बार काफी रहता है।
  • मैंगनीज: धान के बाद की हल्की मिट्टी में पत्तियों पर भूरे-पीले धब्बे दिखें तो यह मैंगनीज की कमी का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ की सलाह से मैंगनीज सल्फेट का छिड़काव करें।

सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए KisanShop पर उपलब्ध कुछ विकल्प: पैदावार जिंक सल्फेट 33%, पैदावार हाइजिंक (जिंक 21% + सल्फर 10%), उत्तम सल्फिनो गोल्ड (सल्फर 90% WG) और अभिमन्यु जीवन मैंगनीज सल्फेट।

गेहूं में सिंचाई: कब और कितनी बार?

गेहूं की कुछ अवस्थाएं पानी के प्रति बहुत संवेदनशील होती हैं। इन अवस्थाओं पर सिंचाई न मिलने से उपज में सबसे ज्यादा कमी आती है। सामान्य परिस्थितियों में 5–6 सिंचाई की जरूरत पड़ती है।

गेहूं की अवस्थाएं और सिंचाई का समय बुवाई के 20 से 25 दिन पर ताज जड़ अवस्था से लेकर 115 से 120 दिन पर दाना कड़ा होने तक छह सिंचाई का कार्यक्रम गेहूं की अवस्थाएं और सिंचाई का समय सिंचाई 1सिंचाई 2सिंचाई 3सिंचाई 4सिंचाई 5सिंचाई 6 ताज जड़(CRI)20–25 दिन कल्ले बनना(टिलरिंग)40–45 दिन गांठ बनना(जॉइंटिंग)60–65 दिन बाली व फूल(फ्लावरिंग)80–85 दिन दूधिया दाना(मिल्किंग)100–105 दिन दाना कड़ा होना(डफ अवस्था)115–120 दिन पानी कम हो तो तीन सिंचाई जरूर दें: CRI, बाली-फूल और दूधिया दाना अवस्था पर
चित्र 4: गेहूं की अवस्थाएं और सिंचाई का समय (बुवाई के बाद के दिन, मौसम के अनुसार थोड़ा आगे-पीछे हो सकते हैं)।
सिंचाईअवस्थाबुवाई के बाद (लगभग)
पहलीताज जड़ अवस्था (CRI)20–25 दिन
दूसरीकल्ले बनना40–45 दिन
तीसरीगांठ बनना60–65 दिन
चौथीबाली निकलना व फूल आना80–85 दिन
पांचवींदूधिया दाना100–105 दिन
छठीदाना कड़ा होना115–120 दिन

पहली सिंचाई सबसे जरूरी मानी जाती है, क्योंकि इसी अवस्था में जड़ें बनती हैं और टॉप ड्रेसिंग का पहला हिस्सा नाइट्रोजन देना होता है। फूल आने और दाना भरने के समय खेत को सूखा न छोड़ें, लेकिन तेज हवा के समय सिंचाई से बचें ताकि फसल गिरे नहीं।

खरपतवार नियंत्रण

गेहूं के शुरुआती 30–40 दिन खरपतवार से सबसे ज्यादा नुकसान का समय होते हैं। उत्तर भारत में गुल्ली डंडा (फैलेरिस माइनर) सबसे बड़ी समस्या है, जबकि चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों में बथुआ, सेंजी, कृष्णनील और हिरनखुरी आम हैं।

  • समय: खरपतवारनाशक का छिड़काव आम तौर पर बुवाई के 30–35 दिन बाद (खरपतवार में 2–4 पत्तियां आने पर), नमी वाले खेत में करें।
  • सही दवा चुनें: संकरी पत्ती (घास कुल) और चौड़ी पत्ती के लिए अलग-अलग दवाएं होती हैं। खेत में कौन-सा खरपतवार है, यह पहचान कर ही दवा चुनें।
  • फ्लैट फैन नोजल: छिड़काव के लिए फ्लैट फैन नोजल इस्तेमाल करें और पानी की मात्रा (आम तौर पर 120–150 लीटर प्रति एकड़) लेबल के अनुसार रखें।
  • दवा बदलते रहें: हर साल एक ही दवा से गुल्ली डंडा में प्रतिरोध पैदा हो सकता है, इसलिए अलग-अलग क्रियाविधि वाली दवाएं बदल-बदलकर प्रयोग करें।
  • लेबल जरूर पढ़ें: मात्रा, पानी, फसल अवस्था और सावधानियां उत्पाद के लेबल पर ही देखें।

गेहूं के लिए उपलब्ध कुछ खरपतवारनाशक: अतुल लोक्सो (सल्फोसल्फ्यूरॉन 75% WG), IIL ओमेगा (क्लोडिनाफॉप प्रोपारगिल 15% WP), बायर अटलांटिस (मेसोसल्फ्यूरॉन + आयोडोसल्फ्यूरॉन), सिंजेंटा एक्सियल (पिनोक्साडेन 5.1% EC) और चौड़ी पत्ती के लिए सिनर्जी मेटाग्रिप (मेट्सल्फ्यूरॉन मिथाइल 20% WP)।

मुख्य रोग और कीट: शुरुआती सावधानी

  • पीला रतुआ: ठंडे और नमी वाले मौसम (आम तौर पर जनवरी–फरवरी) में पत्तियों पर पीली धारियां दिखती हैं। पीला रतुआ रोधी किस्म चुनें और लक्षण दिखते ही कृषि विशेषज्ञ की सलाह से अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव करें।
  • माहू (एफिड): फरवरी-मार्च में बालियों और पत्तियों पर छोटे हरे-काले कीट दिखाई दें तो समय रहते नियंत्रण करें।
  • दीमक: हल्की और रेतीली मिट्टी में पौधे सूखकर गिरने लगें तो दीमक की समस्या हो सकती है। बुवाई के समय बीज उपचार इसका सबसे सस्ता उपाय है।

अगर फसल में कोई बीमारी या कीट समझ न आए, तो प्रभावित पौधे की साफ फोटो के साथ किसी कृषि विशेषज्ञ या KVK से संपर्क करें।

बुवाई के समय होने वाली आम गलतियां

  1. सही समय से बहुत पहले या बहुत देर से बुवाई करना।
  2. इलाके के लिए अनुशंसित न की गई किस्म बोना।
  3. बीज दर का अंदाजा लगाकर बीज डालना, और अंकुरण की जांच न करना।
  4. बिना बीज उपचार के बुवाई करना।
  5. बीज को बहुत गहरा बोना (5 सेमी से ज्यादा)।
  6. एक ही बार में सारा यूरिया डाल देना।
  7. पहली सिंचाई समय पर न देना (CRI अवस्था छूट जाना)।
  8. मिट्टी की जांच कराए बिना जिंक, सल्फर या अन्य तत्व डालना या बिल्कुल न डालना।
  9. खरपतवारनाशक का छिड़काव गलत समय पर या बिना लेबल पढ़े करना।

एक एकड़ गेहूं की बुवाई की चेकलिस्ट

  1. मिट्टी की जांच कराएं और जोन के अनुसार किस्म चुनें।
  2. प्रमाणित बीज (40–50 किग्रा) खरीदें और उसका पक्का बिल रखें।
  3. खेत तैयार करें: पलेवा, 2–3 जुताई, पाटा।
  4. बीज को फफूंदनाशक या जैव-फफूंदनाशक से उपचारित करें।
  5. DAP, पोटाश और यूरिया (बेसल हिस्सा) तैयार रखें।
  6. सही समय पर 4–5 सेमी गहराई और 20–22 सेमी कतार की दूरी पर बुवाई करें।
  7. 20–25 दिन पर पहली सिंचाई और यूरिया की पहली टॉप ड्रेसिंग दें।
  8. 30–35 दिन पर खरपतवारनाशक का छिड़काव करें।
  9. 40–45 दिन पर दूसरी सिंचाई के साथ यूरिया की दूसरी टॉप ड्रेसिंग दें।
  10. इसके बाद रोग-कीट की निगरानी करते हुए बाकी सिंचाई समय पर करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

गेहूं की बुवाई का सबसे अच्छा समय क्या है?

अधिकांश उत्तरी मैदानी क्षेत्रों में सिंचित गेहूं की समय पर बुवाई नवंबर के पहले से तीसरे सप्ताह में की जाती है। पूर्वी भारत (बिहार, झारखंड) में यह 10–25 नवंबर, मध्य भारत में 10–20 नवंबर और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 1–15 नवंबर रहता है।

एक एकड़ में कितना गेहूं का बीज लगता है?

समय पर बुवाई में लगभग 40 किग्रा प्रति एकड़ (100 किग्रा प्रति हेक्टेयर) और देर से बुवाई में लगभग 50 किग्रा प्रति एकड़ (125 किग्रा प्रति हेक्टेयर) बीज लगता है। मोटे दाने वाली किस्म या कम अंकुरण पर थोड़ा ज्यादा बीज लगेगा।

गेहूं में पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?

पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 20–25 दिन बाद, ताज जड़ (CRI) अवस्था पर करनी चाहिए। यही समय नाइट्रोजन की पहली टॉप ड्रेसिंग का भी है।

गेहूं में DAP कितना डालें?

समय पर बुवाई वाले सिंचित गेहूं में 60 किग्रा/हेक्टेयर फॉस्फोरस की सिफारिश के हिसाब से लगभग 52 किग्रा DAP प्रति एकड़ बुवाई के समय डाला जाता है। मिट्टी की जांच में फॉस्फोरस पहले से ज्यादा हो तो मात्रा कम की जा सकती है।

देर से बुवाई के लिए कौन-सी किस्में ठीक रहती हैं?

उत्तर-पश्चिम मैदानी क्षेत्र में DBW 90, WH 1124, DBW 71, HD 3059 और PBW 590 जैसी किस्में देर से बुवाई के लिए अनुशंसित हैं। अन्य जोन की किस्में ऊपर की तालिका में दी गई हैं।

गेहूं में गुल्ली डंडा का नियंत्रण कैसे करें?

बुवाई के 30–35 दिन बाद, खरपतवार की 2–4 पत्ती अवस्था पर, खेत में नमी होने पर, लेबल के अनुसार अनुशंसित खरपतवारनाशक का छिड़काव करें। एक ही दवा बार-बार न दोहराएं और दवा बदलकर इस्तेमाल करें।

महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। बीज, उर्वरक या कृषि रसायन का उपयोग करने से पहले उत्पाद का नवीनतम लेबल पढ़ें और मात्रा, समय व सावधानियों का पालन करें। किस्म, बुवाई की तारीख और खाद की मात्रा अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और राज्य कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार तय करें।