सरसों रबी मौसम की सबसे प्रमुख तिलहनी फसल है। यह कम पानी और कम लागत में तैयार हो जाती है, लगभग 110 से 140 दिन में पकती है और खाने के तेल के साथ-साथ सरसों की खली से पशुओं के लिए भी काम आती है। सही समय पर बुवाई, उपयुक्त किस्म और संतुलित खाद-पानी से किसान भाई कम खर्च में अच्छा उत्पादन ले सकते हैं।
इस लेख में हम सरसों की खेती की पूरी प्रक्रिया क्रम से समझेंगे: जलवायु और मिट्टी, बुवाई का सही समय, खेत की तैयारी, उन्नत किस्में, बीज की मात्रा, बीज उपचार, खाद और उर्वरक, सिंचाई, खरपतवार नियंत्रण, मुख्य कीट और रोग, तथा कटाई और भंडारण। सभी मात्राएं प्रति एकड़ और प्रति हेक्टेयर, दोनों में दी गई हैं।
सरसों की खेती एक नज़र में
| बिंदु | सामान्य सिफारिश |
|---|---|
| फसल अवधि | लगभग 110–140 दिन (किस्म और बुवाई के समय पर निर्भर) |
| बुवाई का समय | सितंबर के आखिरी सप्ताह से नवंबर के पहले पखवाड़े तक (क्षेत्र और सिंचाई के अनुसार) |
| बीज दर | 4–5 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 1.6–2 किग्रा/एकड़) |
| कतार से कतार / पौधे से पौधे की दूरी | 30–45 सेमी / 10–15 सेमी (विरलन के बाद) |
| बीज की गहराई | 2–3 सेमी |
| खाद (सिंचित, किग्रा/हेक्टेयर) | नाइट्रोजन 80, फॉस्फोरस 40, पोटाश 40 और सल्फर (गंधक) 40 |
| सिंचाई | 2–3 सिंचाई (शाखा निकलने, फूल आने और फली बनने की अवस्था पर) |
ध्यान दें: ये मात्राएं सामान्य सिफारिशें हैं। अपने जिले की मिट्टी की जांच, किस्म और मौसम के अनुसार इनमें बदलाव करें। अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राज्य कृषि विश्वविद्यालय की ताजा सलाह जरूर देखें।
सरसों के लिए जलवायु और मिट्टी
सरसों ठंडे और शुष्क मौसम की फसल है। बीज के अंकुरण और शुरुआती बढ़वार के लिए तापमान लगभग 18–25 डिग्री सेल्सियस ठीक रहता है, जबकि फसल की बढ़वार 10–25 डिग्री सेल्सियस के बीच अच्छी रहती है। फूल और फली बनने के समय पाला, कोहरा और लगातार बादल छाए रहना उपज और तेल की मात्रा दोनों को घटा सकते हैं।
अच्छे जल निकास वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त है, जिसका pH लगभग 6.0 से 7.5 के बीच हो। जल जमाव वाली और ज्यादा खारी या क्षारीय मिट्टी में सरसों की फसल कमजोर रहती है।
सरसों की बुवाई का सही समय
सरसों में बुवाई का समय उपज पर सबसे ज्यादा असर डालता है। बहुत जल्दी बोने पर तेज गर्मी में पौधे कमजोर रहते हैं और शुरुआती कीट (चितकबरा कीट, आरा मक्खी) ज्यादा नुकसान करते हैं। बहुत देर से बोने पर फूल आते समय पाला और फली बनते समय माहू का प्रकोप बढ़ जाता है और उपज घटती है।
| स्थिति | क्षेत्र | बुवाई का समय |
|---|---|---|
| असिंचित (बारानी) | उत्तर भारत के वर्षा आधारित क्षेत्र | सितंबर के अंतिम सप्ताह से 15 अक्टूबर तक |
| सिंचित, समय पर | हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश | 5–25 अक्टूबर |
| पूर्वी भारत | बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल | 15 अक्टूबर से 10 नवंबर के आसपास |
| देर से बुवाई | सभी क्षेत्र | 26 अक्टूबर के बाद, नवंबर के मध्य तक |
धान की कटाई के बाद सरसों बोने वाले किसान खेत की तैयारी जल्दी कर लें। इसके लिए हमारा लेख धान कटने के बाद खेत को अगली फसल के लिए कैसे तैयार करें? उपयोगी रहेगा। देर से बुवाई करनी पड़े तो देर से बोने के लिए अनुशंसित किस्में चुनें और खाद-पानी का प्रबंधन समय पर करें।
बुवाई से पहले खेत की तैयारी
सरसों का बीज बहुत छोटा होता है, इसलिए खेत की मिट्टी भुरभुरी और समतल होना बहुत जरूरी है। ऊबड़-खाबड़ खेत में बीज असमान गहराई पर जाता है और जमाव खराब होता है।
- मिट्टी की जांच: बुवाई से पहले जांच कराएं ताकि सल्फर, जिंक और बोरॉन जैसे तत्वों की जरूरत पता चल सके।
- जुताई: पहली गहरी जुताई के बाद 2–3 बार हल्की जुताई करें और हर जुताई के बाद पाटा लगाएं।
- नमी: खेत में नमी कम हो तो बुवाई से पहले पलेवा करें। बहुत गीले खेत में बुवाई न करें।
- गोबर की खाद: जुताई के समय अच्छी सड़ी गोबर की खाद लगभग 4–5 टन प्रति एकड़ (10–12 टन प्रति हेक्टेयर) मिला दें।
- पिछली फसल के अवशेष: खेत में पुराने खरपतवार और फसल अवशेष अच्छी तरह मिट्टी में दबा दें या हटा दें।
सरसों की उन्नत किस्में
किस्म का चुनाव अपने क्षेत्र, बुवाई के समय और सिंचाई की उपलब्धता के हिसाब से करें। देश में सरसों की कई सार्वजनिक किस्में और निजी कंपनियों के हाइब्रिड बीज उपलब्ध हैं। भारतीय सरसों अनुसंधान संस्थान (ICAR-IIRMR, भरतपुर) और राज्य कृषि विश्वविद्यालय नई किस्में समय-समय पर जारी करते रहते हैं।
| प्रकार | किस्मों के उदाहरण | ध्यान रखने योग्य बात |
|---|---|---|
| सार्वजनिक किस्में (OP) | RH 749, RH 725, RH 406, पूसा सरसों 25, 26, 27, 28, DRMRIJ 31 (गिरिराज), क्रांति, वरुणा | इनका बीज किसान 2–3 साल तक बदल-बदलकर या शुद्धता बनाए रखकर उपयोग कर सकते हैं। |
| हाइब्रिड | NRCHB 101, NRCHB 506, निजी कंपनियों के हाइब्रिड | हर साल नया बीज खरीदें। अपना बचाया बीज न बोएं, क्योंकि उपज घट जाती है। |
| कम इरुसिक अम्ल वाली (कैनोला गुणवत्ता) | पूसा डबल जीरो सरसों जैसी किस्में | विशेष गुणवत्ता का तेल; अपने क्षेत्र में उपलब्धता और खरीदार देखकर चुनें। |
किस्मों की उपलब्धता और अनुशंसित क्षेत्र हर साल बदल सकते हैं, इसलिए खरीदने से पहले अपने जिले के कृषि विभाग या KVK से पूछ लें। KisanShop पर उपलब्ध कुछ सरसों के बीज: एडवांटा ADV 414 हाइब्रिड, जैकसन टाइगर 7276 F1 हाइब्रिड, शुलभ 3777, काला सोना गोल्ड और एग्रीबी मस्टर्ड सीड्स 7 प्लस।
किस्म चुनते समय इन बातों का ध्यान रखें
- अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित और अपनी बुवाई की तारीख के अनुकूल किस्म लें।
- पकने की अवधि: देर से बुवाई में जल्दी पकने वाली किस्म चुनें।
- रोग-कीट सहनशीलता: सफेद रोली और माहू वाले इलाकों में इन पर बेहतर स्थिति वाली किस्म को प्राथमिकता दें।
- प्रमाणित या विश्वसनीय स्रोत से बीज खरीदें और पक्का बिल व पैकेट की जानकारी संभालकर रखें।
सरसों की बीज दर और बुवाई की विधि
सरसों का बीज बहुत बारीक होता है, इसलिए बीज की मात्रा का सही अंदाजा बहुत जरूरी है। ज्यादा बीज डालने से पौधे घने हो जाते हैं, कमजोर रहते हैं और रोग बढ़ते हैं। कम बीज डालने से खेत खाली रह जाता है और खरपतवार हावी हो जाते हैं।
- बीज दर: आम तौर पर 4–5 किग्रा प्रति हेक्टेयर (1.6–2 किग्रा प्रति एकड़)। कुछ राज्यों की सिफारिश में यह 5–6 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक होती है, इसलिए अपने राज्य की सलाह देखें।
- बुवाई की विधि: सीड ड्रिल या कतार में बुवाई सबसे अच्छी है। बारीक बीज को सूखी रेत, बारीक मिट्टी या सूखी राख के साथ 1:4–5 के अनुपात में मिलाकर बोने से बीज एक समान गिरता है।
- कतार से कतार की दूरी: 30–45 सेमी।
- गहराई: 2–3 सेमी। इससे ज्यादा गहरा बोने पर अंकुर निकलने में दिक्कत होती है।
- विरलन: बुवाई के 15–20 दिन बाद घने पौधे निकालकर पौधे से पौधे की दूरी 10–15 सेमी कर दें। निकाले गए पौधे हरे चारे के रूप में उपयोग हो सकते हैं।
बीज उपचार: रोगों से शुरुआत में ही बचाव
सरसों में बीज और मिट्टी से फैलने वाले रोग जैसे जड़ सड़न और सफेद रोली की शुरुआती समस्या बीज उपचार से काफी घट सकती है।
- सफेद रोली के लिए: मेटालैक्सिल 35% (एप्रॉन 35 SD या WS) लगभग 6 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचारित करें।
- झुलसा और जड़ रोगों के लिए: कार्बेन्डाजिम लगभग 2 ग्राम प्रति किग्रा बीज की दर से उपचार किया जा सकता है।
- जैविक विकल्प: ट्राइकोडर्मा से भी बीज उपचार किया जा सकता है। इसे रासायनिक फफूंदनाशक के साथ एक ही समय पर न मिलाएं।
उपचार से पहले उत्पाद का लेबल जरूर पढ़ें और मात्रा उसी के अनुसार रखें। बीज को छाया में सुखाकर उसी दिन या अगले दिन बो दें। उपचार करते समय दस्ताने और मास्क पहनें। बीज उपचार के लिए KisanShop पर उपलब्ध एक विकल्प: सिल्वर साइन मेटासाइन (मेटालैक्सिल 35% WS)।
सरसों में खाद और उर्वरक
सरसों में अच्छी उपज के साथ-साथ तेल की मात्रा बढ़ाने के लिए सल्फर (गंधक) बहुत जरूरी है। सल्फर की कमी वाली मिट्टी में पत्तियां हल्की पीली पड़ती हैं, फलियों में दाने कम बनते हैं और तेल घटता है। सिंचित, समय पर बोई गई फसल के लिए सामान्य सिफारिश इस प्रकार है:
| पोषक तत्व | किग्रा/हेक्टेयर | किग्रा/एकड़ |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन (N) | 80 | 32 |
| फॉस्फोरस (P₂O₅) | 40 | 16 |
| पोटाश (K₂O) | 40 (मिट्टी जांच के अनुसार) | 16 |
| सल्फर (S) | 40 | 16 |
DAP में भी लगभग 18% नाइट्रोजन होती है, इसलिए यूरिया की मात्रा उसी के हिसाब से कम रखी गई है। अगर आप फॉस्फोरस के लिए सिंगल सुपर फॉस्फेट (SSP) इस्तेमाल करते हैं, तो उसमें लगभग 12% सल्फर भी होता है, जिससे सल्फर की जरूरत का एक हिस्सा पूरा हो जाता है। उस स्थिति में DAP और सल्फर की मात्रा उसी हिसाब से बदलें।
खाद देने के नियम
- असिंचित फसल: वर्षा आधारित खेती में आम तौर पर लगभग आधी मात्रा (नाइट्रोजन 40, फॉस्फोरस 20, पोटाश 20 और सल्फर 20 किग्रा/हेक्टेयर) पर्याप्त मानी जाती है।
- बेसल खुराक: बुवाई के समय आधी नाइट्रोजन और फॉस्फोरस, पोटाश व सल्फर की पूरी मात्रा खेत में अच्छी तरह मिला दें।
- टॉप ड्रेसिंग: बची आधी नाइट्रोजन पहली सिंचाई के बाद या उसके साथ दें।
- जिंक: जिंक की कमी वाले खेतों में 25 किग्रा/हेक्टेयर (लगभग 10 किग्रा/एकड़) जिंक सल्फेट (21%) बुवाई के समय डालें। यह हर साल देना जरूरी नहीं।
- बोरॉन: फूल आने की अवस्था पर बोरॉन की कमी से फलियों में दाने कम बनते हैं। इसके बारे में विस्तार से पढ़ें: सरसों में फूल आते समय बोरॉन क्यों डालते हैं?
- ज्यादा यूरिया न डालें: अधिक नाइट्रोजन से पौधे हरे-भरे तो होते हैं पर माहू और रोग ज्यादा लगते हैं।
सूक्ष्म पोषक तत्वों के लिए KisanShop पर उपलब्ध कुछ विकल्प: उत्तम सल्फिनो गोल्ड (सल्फर 90% WG), पैदावार सल्फर 90% WDG, पैदावार जिंक सल्फेट 33%, टाटा रैलीज सोलूबोर (बोरॉन 20%) और दयाल बोरोफर्ट 20 (बोरॉन 20%)।
सरसों में सिंचाई: कब और कितनी?
सरसों कम पानी की फसल है, फिर भी कुछ अवस्थाओं पर सिंचाई का असर सीधे उपज पर पड़ता है। सामान्य रूप से 2–3 सिंचाई काफी रहती हैं। फसल पकने के समय सिंचाई न दें।
| सिंचाई | अवस्था | बुवाई के बाद (लगभग) |
|---|---|---|
| पहली | शाखा निकलने की अवस्था (रोजेट) | 25–30 दिन |
| दूसरी | फूल आने की अवस्था | 50–60 दिन |
| तीसरी (जरूरत हो तो) | फली में दाना बनते समय | 75–85 दिन |
- सिर्फ एक सिंचाई का पानी हो तो उसे फूल आने से पहले (लगभग 40–50 दिन) देना बेहतर रहता है।
- पाला पड़ने की आशंका हो तो हल्की सिंचाई से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है।
- खेत में पानी न रुकने दें। जलभराव से जड़ें सड़ जाती हैं।
- फसल पकने की अवस्था में सिंचाई बंद कर दें।
निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण
शुरुआती 30–40 दिन खरपतवार से सबसे ज्यादा नुकसान होता है। सरसों के साथ खेत में बथुआ, जंगली पालक, गुल्ली डंडा और अन्य खरपतवार उगते हैं और खाद-पानी बांट लेते हैं।
- विरलन के साथ निराई: बुवाई के 15–20 दिन पर पौधे छांटते समय पहली निराई-गुड़ाई करें और जरूरत पड़ने पर 35–40 दिन पर दोबारा करें।
- बुवाई के तुरंत बाद: पेंडीमिथालिन जैसी अंकुरण-पूर्व दवा बुवाई के 0–2 दिन के अंदर नमी वाली मिट्टी में लेबल के अनुसार छिड़कें। बाद में निराई के साथ इसकी जरूरत कम हो जाती है।
- लेबल जरूर पढ़ें: मात्रा, पानी, समय और सावधानियां उत्पाद के लेबल पर देखें।
अंकुरण-पूर्व खरपतवारनाशक के लिए KisanShop पर उपलब्ध एक विकल्प: धानुका धनुटॉप (पेंडीमिथालिन 30% EC)।
सरसों के मुख्य कीट और उनकी रोकथाम
माहू (एफिड)
माहू सरसों का सबसे नुकसानदायक कीट है। यह दिसंबर से फरवरी के बीच, खासकर बादल वाले और नमी भरे मौसम में तेजी से बढ़ता है। छोटे हरे-भूरे कीट पत्तियों, फूलों और फलियों का रस चूसते हैं, जिससे फलियां सिकुड़ जाती हैं और दाने कम बनते हैं।
- खेत की नियमित निगरानी करें और माहू की शुरुआत वाले हिस्से पर पहले ध्यान दें।
- पीले चिपचिपे जाल (येलो स्टिकी ट्रैप) लगाने से कीट की निगरानी और कुछ नियंत्रण में मदद मिलती है।
- संख्या ज्यादा बढ़ जाए तो लेबल के अनुसार अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव करें और दवा बदल-बदलकर उपयोग करें।
- फूल आने के समय मधुमक्खियां खेत में आती हैं। इसलिए छिड़काव शाम के समय करें और सुरक्षित दवा चुनें।
KisanShop पर उपलब्ध कुछ विकल्प: अल्बॉग रोटाप्रिड (इमिडाक्लोप्रिड 17.8% SL) और ग्रीन रेवोल्यूशन इको येलो स्टिकी ट्रैप।
अन्य कीट
- चितकबरा कीट और आरा मक्खी: शुरुआती अवस्था में छोटे पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं। समय पर बुवाई और खेत की सफाई से इनका प्रकोप कम रहता है।
- पत्ती सुरंगक: पत्तियों में सफेद टेढ़ी-मेढ़ी सुरंगें बनाता है। ज्यादा प्रकोप होने पर ही रासायनिक उपचार करें।
सरसों के मुख्य रोग और उपचार
| रोग | लक्षण | बचाव और उपाय |
|---|---|---|
| सफेद रोली (सफेद रतुआ) | पत्तियों की निचली सतह पर सफेद छाले, ऊपर पीले धब्बे; फूलों की विकृति | बीज उपचार, फसल चक्र; लक्षण दिखते ही मेटालैक्सिल + मैंकोजेब का छिड़काव (लेबल के अनुसार) |
| पत्ती झुलसा (अल्टरनेरिया) | पत्तियों और फलियों पर गहरे भूरे गोलाकार छल्लेदार धब्बे | स्वस्थ बीज, समय पर बुवाई; कार्बेन्डाजिम + मैंकोजेब या मैंकोजेब का छिड़काव |
| छाछया (पाउडरी मिल्ड्यू) | पत्तियों पर सफेद चूर्ण जैसी परत, देर की फसल में ज्यादा | गंधक आधारित या अनुशंसित फफूंदनाशक का छिड़काव |
| तना सड़न (स्क्लेरोटिनिया) | तने पर सफेद फफूंद और भीतर काले दाने, पौधा मुरझाकर गिर जाता है | फसल चक्र, खेत की सफाई, जल जमाव से बचाव; विशेषज्ञ की सलाह से उपचार |
सफेद रोली में कई जगह बुवाई के 50–60 दिन बाद लक्षण दिखने पर मेटालैक्सिल + मैंकोजेब का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। झुलसा और सफेद रोली दोनों के लिए कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% WP को लगभग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से भी प्रयोग किया जाता है, लेकिन मात्रा हमेशा उत्पाद के लेबल के अनुसार ही रखें। KisanShop पर उपलब्ध कुछ विकल्प: सिल्वर साइन साप (कार्बेन्डाजिम 12% + मैंकोजेब 63% WP) और सिनर्जी M-45 (मैंकोजेब 75% WP)।
कटाई, मड़ाई और भंडारण
- कटाई का सही समय: जब लगभग 75–80% फलियां पीली-भूरी हो जाएं और दाने सख्त हो जाएं, तब कटाई करें। देर करने पर फलियां चटक जाती हैं और दाने खेत में गिर जाते हैं।
- कटाई का समय: सुबह के समय कटाई करने से दाना झड़ने का नुकसान कम होता है।
- सुखाना: कटी फसल को खलिहान में 4–5 दिन अच्छी तरह सुखाएं, फिर मड़ाई करें।
- भंडारण: दानों को साफ करके अच्छी तरह सुखाएं (नमी लगभग 8% तक) और सूखी, हवादार जगह में रखें। ज्यादा नमी से दाने खराब होते हैं और तेल की गुणवत्ता घटती है।
उपज किस्म, बुवाई के समय, मौसम और प्रबंधन पर निर्भर करती है। सही समय पर बुवाई, सल्फर सहित संतुलित खाद, समय पर सिंचाई और माहू-रोग की निगरानी से उपज में अच्छा सुधार मिलता है।
सरसों की खेती में आम गलतियां
- सही समय से बहुत पहले या बहुत देर से बुवाई करना।
- क्षेत्र के लिए अनुशंसित न की गई किस्म बोना या हाइब्रिड का अपना बचाया बीज दोबारा बोना।
- बीज बहुत ज्यादा डालना और विरलन न करना।
- बिना बीज उपचार के बुवाई करना।
- सल्फर न डालना और केवल यूरिया-DAP पर निर्भर रहना।
- फूल आने पर सिंचाई चूक जाना।
- माहू की निगरानी न करना और देर से दवा छिड़कना।
- फूल के समय तेज जहरीली दवा दिन में छिड़ककर मधुमक्खियों को नुकसान पहुंचाना।
- कटाई में देरी करना, जिससे दाना झड़ता है।
एक एकड़ सरसों की खेती की चेकलिस्ट
- मिट्टी की जांच कराएं और क्षेत्र के अनुसार किस्म चुनें।
- खेत तैयार करें: 2–3 जुताई, पाटा, गोबर की खाद (4–5 टन)।
- 1.6–2 किग्रा प्रमाणित बीज लें और बीज उपचार करें।
- सही समय पर 30–45 सेमी कतार और 2–3 सेमी गहराई पर बुवाई करें।
- बुवाई के समय DAP, पोटाश, सल्फर और आधा यूरिया दें।
- 0–2 दिन में खरपतवारनाशक (अंकुरण-पूर्व) लगाएं या बाद में निराई करें।
- 15–20 दिन पर विरलन करें।
- 25–30 दिन पर पहली सिंचाई और बचा यूरिया दें।
- 50–60 दिन पर फूल आने पर दूसरी सिंचाई और बोरॉन का छिड़काव (जरूरत हो तो)।
- दिसंबर से फरवरी तक माहू और रोगों की निगरानी रखें।
- फलियां 75–80% पीली-भूरी होने पर कटाई करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सरसों की बुवाई का सबसे अच्छा समय क्या है?
उत्तर भारत में असिंचित सरसों की बुवाई सितंबर के आखिरी सप्ताह से 15 अक्टूबर तक और सिंचित सरसों की बुवाई आम तौर पर 5 से 25 अक्टूबर तक की जाती है। बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में यह मध्य अक्टूबर से नवंबर के पहले सप्ताह तक चलती है।
एक एकड़ में सरसों का कितना बीज लगता है?
आम तौर पर 1.6 से 2 किग्रा प्रति एकड़ (4–5 किग्रा प्रति हेक्टेयर) बीज लगता है। कुछ राज्यों में 5–6 किग्रा प्रति हेक्टेयर तक की सिफारिश है।
सरसों में सल्फर क्यों जरूरी है?
सल्फर सरसों के तेल और प्रोटीन बनने की प्रक्रिया में मदद करता है। इसकी कमी से उपज और तेल की मात्रा दोनों घटती हैं। सामान्य सिफारिश 40 किग्रा सल्फर प्रति हेक्टेयर (लगभग 16 किग्रा प्रति एकड़) है।
सरसों में पहली सिंचाई कब करनी चाहिए?
पहली सिंचाई बुवाई के लगभग 25–30 दिन बाद, जब पौधों में शाखाएं निकलने लगें, तब करनी चाहिए। इसके बाद दूसरी सिंचाई फूल आने पर (50–60 दिन) की जाती है।
सरसों में माहू का नियंत्रण कैसे करें?
नियमित निगरानी करें, पीले चिपचिपे जाल लगाएं और संख्या ज्यादा होने पर लेबल के अनुसार अनुशंसित कीटनाशक का छिड़काव शाम के समय करें, ताकि मधुमक्खियों को नुकसान न हो। ज्यादा नाइट्रोजन देने से बचें।
सरसों कितने दिन में पकती है?
किस्म और बुवाई के समय के अनुसार सरसों की फसल लगभग 110 से 140 दिन में पक जाती है। जब 75–80% फलियां पीली-भूरी हो जाएं तब कटाई करें।
महत्वपूर्ण सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। बीज, उर्वरक या कृषि रसायन का उपयोग करने से पहले उत्पाद का नवीनतम लेबल पढ़ें और मात्रा, समय व सावधानियों का पालन करें। किस्म, बुवाई की तारीख और खाद की मात्रा अपने क्षेत्र की मिट्टी, मौसम और राज्य कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह के अनुसार तय करें।
