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फसल की पत्तियां पीली क्यों पड़ती हैं? पोषक तत्वों की कमी और रोग की पहचान

फसल की पत्तियां पीली क्यों पड़ती हैं? पोषक तत्वों की कमी और रोग की पहचान

खेत में फसल की पत्तियों का पीला पड़ना किसान की सबसे आम चिंताओं में से एक है। पिछले हफ़्ते तक गहरी हरी दिखने वाली फसल अचानक फीकी पड़ जाती है, और सवाल उठता है: यह पोषक तत्वों की कमी है, कोई रोग है, कीट है, या बस पानी ज़्यादा हो गया? सही कारण पता होना ज़रूरी है, क्योंकि ज़िंक की कमी वाले खेत में फफूंदनाशक छिड़कने से पैसा बेकार जाता है, और रोग वाले खेत में यूरिया डालने से कोई फ़ायदा नहीं होता।

इस लेख में हम आसान भाषा में बताएँगे कि फसल की पत्तियाँ पीली क्यों पड़ती हैं, पोषक तत्वों की कमी और रोग में फ़र्क कैसे करें, और हर स्थिति में क्या करना चाहिए। असली तरकीब यह देखना है कि कौन सी पत्तियाँ पीली हो रही हैं और पीलापन कैसा दिखता है।

पत्तियों का पीलापन एक नज़र में

पत्ती हरी इसलिए होती है कि उसमें क्लोरोफिल होता है, जो पौधे के लिए भोजन बनाता है। जब पौधा पर्याप्त क्लोरोफिल नहीं बना पाता, या पत्ती को नुकसान पहुँचता है, तो वह हल्की हरी, पीली या सफ़ेद पड़ जाती है। इसे क्लोरोसिस कहते हैं। इसके पाँच तरह के कारण हो सकते हैं:

कारण का समूहआम पहचानउदाहरण
पोषक तत्वों की कमीसाफ़ पैटर्न में एक-सा पीलापन; पत्ती के दोनों तरफ़ एक जैसा; खेत के पूरे हिस्से या टुकड़ों मेंनाइट्रोजन, ज़िंक, आयरन, सल्फर, मैग्नीशियम, पोटाश
रोगधब्बे, चकत्ते, मोज़ेक, मुड़ना या मुरझाना; पौधे से पौधे में फैलता हैपत्ती धब्बा, झुलसा, उकठा, रस्ट (गेरुई), वायरस
कीट और माइटपत्ती पर हल्के बिंदु, मुड़ना, चिपचिपा रस, पत्ती के नीचे कीटमाहू, सफ़ेद मक्खी, हरा तेला, थ्रिप्स, माइट (मकड़ी)
पानी और मिट्टी की समस्याभारी बारिश के बाद या नीची जगहों पर पीलापन; कमज़ोर जड़ेंजलभराव, सूखा, खारी या क्षारीय मिट्टी, कड़ी मिट्टी
अन्य कारणछिड़काव के बाद अचानक पीला-भूरा जलना, या ठंड में पीलापनखरपतवारनाशक का बहकाव, दवा की ग़लत मात्रा, पाला, गर्मी, पत्ती का पुराना होना

पहला सुराग: पुरानी पत्तियाँ या नई पत्तियाँ?

कुछ पोषक तत्व पौधे के अंदर एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। मिट्टी में कमी होने पर पौधा उन्हें पुरानी पत्तियों से खींचकर नई बढ़वार को भेज देता है। इसलिए इनकी कमी सबसे पहले पुरानी, निचली पत्तियों पर दिखती है। नाइट्रोजन, पोटाश, मैग्नीशियम और फास्फोरस ऐसे ही हैं।

कुछ तत्व एक बार पत्ती में पहुँचने के बाद आगे नहीं जाते। इनकी कमी सबसे पहले नई, ऊपरी पत्तियों पर दिखती है। आयरन, सल्फर, ज़िंक, मैंगनीज़, कैल्शियम और बोरॉन ऐसे ही हैं।

पौधे पर पीलापन कहाँ से शुरू होता है ऊपर नई पत्तियों और नीचे पुरानी पत्तियों वाला पौधा। पुरानी पत्तियों का पीलापन नाइट्रोजन, पोटाश, मैग्नीशियम या फास्फोरस की कमी बताता है। नई पत्तियों का पीलापन आयरन, सल्फर, ज़िंक, मैंगनीज़, कैल्शियम या बोरॉन की कमी बताता है। देखिए पीलापन कहाँ से शुरू हुआ पुरानी (निचली) पत्तियाँ पीली नाइट्रोजन, पोटाश, मैग्नीशियम, फास्फोरस (पौधा इन्हें ऊपर भेज देता है) नई (ऊपरी) पत्तियाँ फीकी आयरन, सल्फर, ज़िंक, मैंगनीज़, कैल्शियम, बोरॉन (ये ऊपर नहीं जा पाते)
यह एक सरल नियम है। खेत में मिले-जुले लक्षण भी हो सकते हैं, इसलिए पीलेपन का पैटर्न भी देखें और मिट्टी की जाँच कराएँ।

दूसरा सुराग: पीलेपन का पैटर्न

एक पत्ती को ध्यान से देखिए। पीलेपन का आकार बहुत कुछ बताता है:

  • पूरी पत्ती एक-सी फीकी या पीली: आमतौर पर नाइट्रोजन (पुरानी पत्तियाँ) या सल्फर (नई पत्तियाँ)। जलभराव में भी ऐसा दिखता है।
  • नसों के बीच पीला, नसें हरी: आयरन, मैग्नीशियम, मैंगनीज़ या ज़िंक। आयरन नई पत्तियों पर और मैग्नीशियम पुरानी पत्तियों पर दिखता है।
  • सिरे या किनारे से पीला होकर भूरा जलना: पोटाश की कमी, या नमक या खाद का जलना।
  • भूरे या गहरे केंद्र वाले पीले धब्बे, या धब्बे के चारों ओर पीला घेरा: पत्ती धब्बा रोग (फफूंद या जीवाणु से)।
  • हल्का-गहरा हरा मोज़ेक, पत्तियों का मुड़ना, बौने पौधे: वायरस, जिसे अक्सर सफ़ेद मक्खी या माहू फैलाते हैं।
पत्ती पर पीलेपन के तीन आम पैटर्न बाएँ: सिरे से बीच की नस के साथ पीली पत्ती, जो नाइट्रोजन की कमी बताती है। बीच में: हरी नसों के बीच पीली पत्ती, जो आयरन, मैग्नीशियम या ज़िंक की कमी बताती है। दाएँ: पीले घेरे वाले भूरे धब्बों की पत्ती, जो पत्ती धब्बा रोग बताती है। तीन पैटर्न, तीन अलग कारण V आकार का पीलापन सिरे से, पुरानी पत्तियों पर नाइट्रोजन हरी नसों के बीच पीला नई पत्तियाँ: आयरन, ज़िंक, मैंगनीज़ पुरानी पत्तियाँ: मैग्नीशियम पीले घेरे वाले धब्बे भूरा केंद्र, पौधे से पौधे में फैलता है पत्ती धब्बा रोग
चित्र केवल समझाने के लिए हैं। खेत में फसल, किस्म और मौसम के अनुसार लक्षण थोड़े अलग दिख सकते हैं।

पोषक तत्वों की कमी: पहचान और सुधार

नीचे की तालिका में आम कमियाँ दी गई हैं। सुधार की मात्राएँ पहली मदद वाले छिड़काव की सामान्य सीमाएँ हैं। जो भी उत्पाद इस्तेमाल करें, उसका लेबल ज़रूर पढ़ें, और मिट्टी की जाँच कराएँ ताकि असली समस्या ठीक हो।

पोषक तत्वकौन सी पत्तियाँकैसा दिखता हैसामान्य सुधार
नाइट्रोजन (N)पहले पुरानी, निचली पत्तियाँफीकी हरी से पीली, सिरे से V आकार में; धीमी और पतली बढ़वारयूरिया को बाँटकर टॉप-ड्रेसिंग में दें; 1–2% यूरिया का पर्णीय छिड़काव (10–20 ग्राम प्रति लीटर) जल्दी हरापन लाता है
फास्फोरस (P)पुरानी पत्तियाँगहरी हरी या बैंगनी पत्तियाँ, बौने पौधे, कमज़ोर जड़ेंबुवाई के समय DAP या SSP; ठंडी मिट्टी में कमी और बढ़ जाती है
पोटाश (K)पुरानी पत्तियाँसिरों और किनारों पर पीला-भूरा झुलसनामिट्टी में म्यूरेट ऑफ़ पोटाश; पर्णीय पोटैशियम नाइट्रेट (13:00:45) लगभग 0.5–1% (5–10 ग्राम प्रति लीटर)
मैग्नीशियम (Mg)पुरानी से बीच की पत्तियाँनसों के बीच पीला, नसें हरी; पत्तियाँ नारंगी या लाल भी हो सकती हैंपर्णीय मैग्नीशियम सल्फेट लगभग 0.5–1% (5–10 ग्राम प्रति लीटर); मिट्टी में मिट्टी जाँच के अनुसार
सल्फर (S)नई पत्तियाँपूरी नई पत्ती हल्की पीली (नाइट्रोजन जैसी, पर नई बढ़वार पर)मिट्टी में जिप्सम, SSP या सल्फर; सरसों, दलहन और तिलहन में खास तौर पर ज़रूरी
आयरन (Fe)नई पत्तियाँहरी नसों के साथ पीली या सफ़ेद-सी नई पत्तियाँ; क्षारीय या जलभराव वाली मिट्टी में आमपर्णीय फेरस सल्फेट लगभग 0.5% (5 ग्राम प्रति लीटर) के साथ चुटकी भर सिट्रिक एसिड, या चिलेटेड आयरन उत्पाद
ज़िंक (Zn)नई से बीच की पत्तियाँनसों के बीच फीके या सफ़ेद-से चकत्ते, छोटी पत्तियाँ, ज़ंग जैसे भूरे धब्बे; धान में "खैरा", मक्का में "सफ़ेद कली"मिट्टी जाँच के अनुसार मिट्टी में ज़िंक सल्फेट; पर्णीय लगभग 0.5% (5 ग्राम प्रति लीटर)
मैंगनीज़ (Mn)नई पत्तियाँनसों के बीच हल्के स्लेटी-पीले चकत्ते; हल्की मिट्टी में धान के बाद गेहूँ में आमपर्णीय मैंगनीज़ सल्फेट लगभग 0.5% (5 ग्राम प्रति लीटर)
बोरॉन (B)बढ़ते सिरेमोटी, भंगुर, टेढ़ी-मेढ़ी नई पत्तियाँ; बढ़ने वाला सिरा सूख जाता है; फूल कमपर्णीय बोरॉन (20%) लगभग 1 ग्राम प्रति लीटर; ज़्यादा न डालें, इसकी सुरक्षित सीमा कम है
कैल्शियम (Ca)बढ़ते सिरे और फलकिनारों से जली, मुड़ी हुई नई पत्तियाँ; टमाटर में फल के निचले सिरे का सड़नालेबल के अनुसार कैल्शियम नाइट्रेट का छिड़काव; मिट्टी में नमी एक-सी रखें

पर्णीय छिड़काव के सुझाव: छिड़काव सुबह जल्दी या शाम को करें, तेज़ दोपहरी की धूप में कभी नहीं। पत्तियों की दोनों सतहें भिगोएँ। पहले थोड़े हिस्से में आज़माकर 2–3 दिन बाद देखें। बिना यह जाँचे कि दवाएँ आपस में मिलती हैं या नहीं, एक टंकी में कई उत्पाद न मिलाएँ।

पीलापन लाने वाले रोग

जब पीलेपन के साथ धब्बे, चकत्ते, मुरझाना या फफूंद की बढ़वार दिखे, तो रोग के बारे में सोचिए। आम रोग ये हैं:

रोग का प्रकारक्या दिखता हैउदाहरण
फफूंद से पत्ती धब्बे और झुलसागोल या टेढ़े धब्बे, अक्सर पीले घेरे के साथ; पत्तियाँ सूखकर गिरती हैं; नम मौसम में ज़्यादाअगेती झुलसा, पत्ती धब्बा, एन्थ्रेक्नोज़, चूर्णिल और मृदुरोमिल आसिता
रस्ट (गेरुई)पत्ती पर नारंगी या पीले पाउडर जैसे दाने या धारियाँगेहूँ में पीली और भूरी गेरुई
जीवाणु रोगपानी भरे कोणीय धब्बे; पत्ती के सिरे या किनारे से पीली टेढ़ी धारियाँधान में जीवाणु पर्ण झुलसा, टमाटर और मिर्च में बैक्टीरियल स्पॉट
वायरस रोगपीला-हरा मोज़ेक, पत्तियों का मुड़ना, छोटी पत्तियाँ, बौने पौधे; सफ़ेद मक्खी, माहू या थ्रिप्स से फैलता हैमिर्च और टमाटर में पर्ण कुंचन (लीफ़ कर्ल), भिंडी में पीला शिरा मोज़ेक
उकठा और जड़ सड़ननिचली पत्तियाँ पीली, नमी होने पर भी दिन में पौधा मुरझाता है; जड़ या तने का आधार भूराफ्यूज़ेरियम उकठा, जड़ सड़न, कॉलर रॉट
सूत्रकृमि (निमेटोड)खेत में गोल पीले, कमज़ोर टुकड़े; जड़ों पर छोटी गाँठेंसब्ज़ियों में जड़-गाँठ सूत्रकृमि

कमी और रोग में फ़र्क कैसे करें

बिंदुपोषक तत्वों की कमीरोग या कीट
पत्ती पर पैटर्नएक-सा और सममित; पत्ती के दोनों आधे हिस्सों में एक जैसाअसमान; धब्बे, चकत्ते, या एक ही तरफ़
खेत में पैटर्नमिट्टी के अनुसार: पूरा खेत या मिट्टी के प्रकार, ऊँची-नीची जगह से मेल खाते टुकड़ेकुछ पौधों से शुरू होकर अगले पौधों में फैलता है
कौन सी पत्तियाँपुरानी या नई, साफ़ क्रम मेंकोई भी पत्ती, अक्सर मिली-जुली उम्र की
अन्य संकेतन फफूंद, न कीटफफूंद की बढ़वार, कीट, चिपचिपा रस, मुड़ना, सड़न
फैलावपौधे से पौधे में नहीं फैलताफैलता है, खासकर नम मौसम में या कीटों से
सुधार का असरसही पोषक तत्व देने पर ठीक होता हैखाद देने से ठीक नहीं होता

चरण-दर-चरण: अपने खेत में कारण खोजें

  1. देखिए कौन सी पत्तियाँ पीली हैं: पुरानी (निचली), नई (ऊपरी), या सभी।
  2. पैटर्न देखिए: एक-सा पीला, नसों के बीच पीला, सिरे का जलना, धब्बे, या मोज़ेक।
  3. पत्ती पलटकर देखिए: पत्ती के नीचे सफ़ेद मक्खी, माहू, थ्रिप्स, माइट या सफ़ेद पाउडर तो नहीं।
  4. जड़ और तने का आधार देखिए: एक पौधा उखाड़ें। स्वस्थ जड़ें सफ़ेद और मज़बूत होती हैं। भूरी, सड़ी जड़ें या गाँठें जड़ रोग या सूत्रकृमि बताती हैं। तने को आधार के पास काटें: अंदर भूरी धारियाँ उकठा बताती हैं।
  5. पानी जाँचिए: क्या मिट्टी में जलभराव है, या लंबे समय तक सूखा रहा? क्या कोई नीची जगह है जहाँ पानी खड़ा रहता है?
  6. पिछले 10 दिन में क्या किया, याद कीजिए: आसपास खरपतवारनाशक का छिड़काव, कोई नई दवा, खाद की भारी मात्रा, या मौसम में बदलाव जैसे ठंडी रातें।
  7. खेत का पैटर्न देखिए: पूरा खेत, टुकड़े, या एक कोने से फैलता हुआ।
  8. मिट्टी की जाँच कराइए (और हो सके तो पत्ती की जाँच भी), पास की मृदा परीक्षण प्रयोगशाला या अपने कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से।

मुख्य फसलों में पीलेपन की आम समस्याएँ

फसलआम कारणक्या देखें
धानज़िंक की कमी ("खैरा"); नाइट्रोजन की कमी; नर्सरी और सीधी बुवाई में आयरन; जीवाणु पर्ण झुलसारोपाई के बाद नई से बीच की पत्तियों पर ज़ंग जैसे भूरे धब्बे और बौनापन (ज़िंक); एक-सी फीकी हरी पत्तियाँ (नाइट्रोजन); किनारे से पीली टेढ़ी धारियाँ (जीवाणु झुलसा)
गेहूँनाइट्रोजन की कमी; मैंगनीज़ या सल्फर की कमी; पीली गेरुई; सर्दी में जलभरावनिचली पत्तियाँ पीली (नाइट्रोजन); धान के बाद हल्की मिट्टी में फीके चकत्ते (मैंगनीज़); पाउडर वाली पीली धारियाँ (पीली गेरुई)
मक्कानाइट्रोजन और ज़िंक की कमीपत्ती के सिरे से V आकार का पीलापन (नाइट्रोजन); नई पत्तियों पर फीकी या सफ़ेद-सी पट्टियाँ (ज़िंक)
सरसोंसल्फर की कमी; सफ़ेद रस्ट; माहूनई पत्तियाँ फीकी और फलियों में दाने कम (सल्फर); पत्ती के नीचे सफ़ेद फफोले (सफ़ेद रस्ट)
मिर्च, टमाटरपर्ण कुंचन वायरस; मैग्नीशियम या कैल्शियम की कमी; उकठासफ़ेद मक्खी के साथ मुड़ी, पीली, छोटी पत्तियाँ (वायरस); पुरानी पत्तियों में नसों के बीच पीला (मैग्नीशियम)
आलूनाइट्रोजन की कमी; झुलसा; जलभरावनिचली पत्तियाँ पीली (नाइट्रोजन); पानी भरे धब्बे और सफ़ेद फफूंद (पछेती झुलसा)
गन्ना, केलाक्षारीय मिट्टी में आयरन की कमी; जलभरावहरी नसों के साथ नई पत्तियाँ सफ़ेद से पीली (आयरन)

पीलापन कैसे रोकें

  • हर 2–3 साल में मिट्टी की जाँच कराएँ और खाद आदत से नहीं, जाँच के नतीजे से दें।
  • नाइट्रोजन बाँटकर दें: यूरिया एक बार में ज़्यादा देने के बजाय 2–3 बार में दें।
  • जैविक पदार्थ डालें: अच्छी सड़ी गोबर की खाद या कम्पोस्ट से पोषक तत्वों की उपलब्धता और जड़ों की सेहत सुधरती है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व न छोड़ें, खासकर जिन इलाकों में कमी जानी-पहचानी है, जैसे धान और मक्का में ज़िंक।
  • जल निकासी ठीक करें: नालियाँ बनाएँ ताकि खेत में पानी खड़ा न रहे।
  • सिंचाई एक-सी रखें: न बहुत ज़्यादा, न बहुत कम; लंबे सूखे के बाद अचानक बाढ़ जैसी सिंचाई से बचें।
  • बीज उपचार और फसल चक्र अपनाएँ, ताकि मिट्टी से लगने वाले रोग घटें।
  • हर हफ़्ते खेत देखें: कीट और रोग तब पकड़ें जब केवल कुछ पौधे प्रभावित हों।
  • बहकाव से बचें: पड़ोसी खेत में खरपतवारनाशक छिड़का गया हो तो अपनी फसल को उससे दूर रखें, और शांत मौसम में छिड़काव करें।

आम गलतियाँ

  • कारण जाने बिना हर पीले खेत में केवल यूरिया डालना।
  • पोषक तत्वों की कमी पर फफूंदनाशक या कीटनाशक छिड़कना, या इसका उलटा।
  • जलभराव वाले पौधों को और खाद देना। जड़ें उसे ले नहीं पातीं, और ज़्यादा नमक उन्हें जला सकता है।
  • सूक्ष्म पोषक तत्व की लेबल से ज़्यादा मात्रा देना, खासकर बोरॉन और ज़िंक।
  • संगतता देखे बिना एक टंकी में कई उत्पाद मिला देना।
  • देर करना। जल्दी सुधार सस्ता भी पड़ता है और उपज भी बेहतर देता है।

पीली पत्तियों की जाँच-सूची

  1. क्या पुरानी पत्तियाँ पीली हैं या नई?
  2. पीलापन एक-सा है, नसों के बीच है, सिरे पर है, धब्बेदार है या मोज़ेक जैसा?
  3. क्या मैंने पत्ती के नीचे कीट देखे?
  4. क्या मैंने जड़ और तने का आधार जाँचा?
  5. क्या जलभराव या लंबा सूखा रहा है?
  6. क्या फसल पर कोई खरपतवारनाशक या नई दवा लगी?
  7. क्या मैंने मिट्टी का नमूना जाँच के लिए भेजा?
  8. क्या मैंने सुधार पहले छोटे हिस्से में आज़माया और 2–3 दिन बाद फिर देखा?

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

फसल की पत्तियाँ पीली क्यों पड़ती हैं?

मुख्य कारण हैं: नाइट्रोजन, ज़िंक, आयरन या सल्फर जैसे पोषक तत्वों की कमी; पत्ती धब्बा, उकठा या वायरस जैसे रोग; सफ़ेद मक्खी और माहू जैसे कीट; जलभराव या सूखा; और खरपतवारनाशक या दवा की ग़लत मात्रा से हुआ रासायनिक नुकसान।

पीलापन पोषक तत्व की कमी से है या रोग से, कैसे पहचानें?

कमी का पीलापन आमतौर पर एक-सा और सममित होता है, खेत में मिट्टी के पैटर्न के अनुसार दिखता है, और पौधे से पौधे में नहीं फैलता। रोग में धब्बे, चकत्ते, फफूंद, मुरझाना या मुड़ना दिखता है और वह पौधे से पौधे में फैलता है। कीट, चिपचिपा रस या सड़ी जड़ें भी कमी से अलग इशारा करती हैं।

निचली पत्तियाँ सबसे पहले पीली क्यों होती हैं?

यह उस तत्व की कमी का संकेत है जो पौधे के अंदर चल सकता है, मुख्यतः नाइट्रोजन, पोटाश, मैग्नीशियम या फास्फोरस। पौधा इसे पुरानी पत्तियों से खींचकर नई बढ़वार को देता है। उकठा, जड़ सड़न और जलभराव की शुरुआत भी निचली पत्तियों से हो सकती है।

ऊपर की नई पत्तियाँ पीली क्यों पड़ती हैं?

यह उस पोषक तत्व की कमी का संकेत है जो आगे नहीं चलता, जैसे आयरन, सल्फर, ज़िंक, मैंगनीज़, कैल्शियम या बोरॉन। बढ़ते सिरे पर वायरस या कीट का हमला भी नई पत्तियों को पीला कर सकता है।

क्या हर पीली फसल में यूरिया डालना सही है?

नहीं। यूरिया तभी काम करता है जब नाइट्रोजन की कमी हो। अगर कारण ज़िंक, आयरन, सल्फर, रोग या जलभराव है, तो यूरिया से ठीक नहीं होगा और फसल को नुकसान भी हो सकता है। पहले कारण पता कीजिए।

क्या पर्णीय छिड़काव से पीली पत्तियाँ जल्दी ठीक हो सकती हैं?

सूक्ष्म पोषक तत्वों और नाइट्रोजन की कमी में पर्णीय छिड़काव से कुछ दिनों में हरापन दिख सकता है। यह जल्दी की पहली मदद है, मिट्टी सुधारने का विकल्प नहीं। रोग या कीट के नुकसान में इसका इस्तेमाल न करें।

क्या जलभराव से भी पत्तियाँ पीली हो जाती हैं?

हाँ। खड़े पानी में जड़ों को हवा नहीं मिलती और वे पोषक तत्व नहीं ले पातीं, इसलिए मिट्टी में खाद होने पर भी पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं। पहले खेत का पानी निकालिए, फिर मिट्टी के काम लायक होने पर पोषण सुधारिए।

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ज़रूरी सूचना: यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है। पोषक तत्वों की मात्रा, छिड़काव और कीटनाशक मिट्टी या पत्ती की जाँच के बाद और उत्पाद के नवीनतम लेबल के अनुसार चुनें। सिफ़ारिशें फसल, मिट्टी, किस्म, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार बदल सकती हैं, इसलिए अंतिम निर्णय अपने नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राज्य कृषि विभाग की सलाह से लें। किसान कॉल सेंटर: 1800-180-1551 (टोल फ़्री)।